A Message to Unbox

Stories by Prerna Sachdeva
डर लगता है ॥

डर लगता है ॥

डर लगता है ॥

वक़्त हो गया  ए ख़ुशी, तुझ से  मिले
आज जो मिली तो डर लगता है

दीदार करा था बरसों पहले,
कहीं हो न जाए तू फिर से लुप्त, डर लगता है

तू  होती है जब या नही होती तब,
दोनों ही वक़्त,मुझको डर लगता है

क्या फायदा ऐसी खुशी का -ओ खुशी,
जिसमे हर एक पल मुझको डर लगता है

कमी निकालेगी तू मुझमे, कहकर ये कि तू तो आई,
और मुझे नाजायज़ डर लगता है

आ पास  बैठ मेरे और  समझ बात को,
तू  आती इतनी फुर्सत में है और जाती इतनी जल्दी,
तेरी इसी आदत से मुझे डर लगता है

ना दियो इस बार शिकायत मुझे,
रुक थोड़ा मेरे पास लम्बा समय,
कि मैं भूल जाऊं,मुझे डर लगता है

AMessageToUnbox-PrernaSachdeva

Image by Jill Wellington from Pixabay

12 comments found

  1. Good one….Appreciated…….lekin mujhe darr lagta hai ki Prerna badi writer ho jaane ke baad kahin humein bhool na jaaye……….

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