A Message to Unbox

Stories by Prerna Sachdeva
Two Liners by Prerna Sachdeva

Two Liners by Prerna Sachdeva

Two Liners by Prerna Sachdeva

समझता सिर्फ समझदार है,
नासमझ को समझा पाए, तो आप मे बात है॥

~Prerna
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है जिसके पास, दावा है उसका पक्का
कि सबसे अच्छी सिर्फ उसके पास।
:
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कौन ?
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:
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:
“माँ ”
——–

~Prerna
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मत कर इतनी तारीफ मेरी- ऐ दोस्त ,
अच्छा बनने में मेरा अपना स्वार्थ है।
.
.
.
अच्छा करने पर मुझको काफ़ी अच्छा लगता है॥

~ Prerna
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I ignored the itching in the first place.
A year later, I complained to God for the wound.

~Prerna
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क्यूँ इतराऊ अपनी तारीफ सुनने पर?

पीठ पीछे वो कैसे है, अब तलक मैंने जाना नहीं॥

~ Prerna
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गर वो माँगता खुद, तो मैं हंसता जरूर।
पर जो ये हाल है उसका, ख़ुदा से उसने खुद माँगा नहीं॥

गर = अगर

~प्रेरणा
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वो सादगी,वो सच्चाई
कहीं ओर नहीं।
जैसी मैंने आईने में समाई परछाई में देखी है॥

~प्रेरणा
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अगर वो लिखा था,तो फिर इलज़ाम कैसा?
गर नहीं..
तो जुबां पर ज़िक्र,किस्मत का क्यो ?

~प्रेरणा
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हम निहायत कच्चे खिलाड़ी निकले रफ़ीक।
जब तक वो खेल समझ में आया,बाज़ी हार चुके थे॥

रफ़ीक = दोस्त

~प्रेरणा
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कुछ इस तरह उसने अपनी जिंदगी में खुशियों का आगमन कर दिया,
जो कुछ था उसके पास,उससे वंचित रहने का पलभर खयाल कर लिया ॥

~प्रेरणा
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पैसा था वही, रकम भी वही
फिर भी ना जाने कुछ दर्द सा हुआ ।
अपना था इस बार, पिता का नहीं
इसलिए दिल से खर्च ना हुआ ॥

~प्रेरणा
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बदलना चाहता था मैं खुद को,
पर बिना बदले खुद को ।
बदला माहौल जबसे अपना,
बदला पाया मैंने खुद को ॥

~प्रेरणा
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A Message To क़ारी/Reader

बस इतना सा एहसान तू कर दे क़ारी।
जितने जज़्बात के साथ मैं लिखता हूँ बात,उतने जज़्बे के साथ तू मुताला करना ॥

मुताला करना = पढ़ना

~प्रेरणा
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तू वो यार नहीं जिसकी हमें तलाश है।
तकल्लुफ करना, हमें अरसों से ना मंजूर है॥
~प्रेरणा
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जिंदगी की रफ़्तार ज़रा धीमी कर राही।
रूह कुछ कहती है तुझ से,
एक दफ़ा सुन तो ले॥

~प्रेरणा
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It’s not the teacher who should be appreciated always but the student who implements the lessons.

~Prerna
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दुख में नीवा हो दिये या जब आपत्ति होए,
सुख में नीवा तू रहे, तो दुख किस बात का होए ।।

नीवा =Humble

~प्रेरणा
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उस तसववुर में छुपी जो तस्वीर है,
वो तस्वीर ही तुम्हारी तकदीर है।।

तसववुर= Imagination

~प्रेरणा
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उस बात में कैसी बात,
जिस बात में हो बात ही बात ।
बात में बात तो तब हो,
जब बेबात हो जाए सारी बात ॥

बेबात = बिन बात

~प्रेरणा
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